अंतर है सत्य और धर्म में || महाभारत पर (2018)
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
हे भारत! जब-जब धर्म की हानि होती है तथा अधर्म का अभ्युत्थान होता है, तब-तब मैं स्वयं का सृजन करता हूँ अर्थात् जन्म लेता हूँ।
~ श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय ४, श्लोक ७
प्रश्नकर्ता: वह धर्म ही क्या जिसे किसी की रक्षा की… read_more